असंभव के खिलाफ

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Description

प्रिय पाठको ,

साहित्य समाज का दर्पण होता है | यह भी सच है कि कवि समाज में रहकर भी समाज को एक निरपेक्ष दृष्टि से देखता है | इक्कीसवीं सदी का समाज बहुत तेजी से बदल रहा है | आज का युग संचार युग कहा जाता है | इस संचार क्रांति में बहुत बड़ा योगदान तकनीक का रहा है | सूचना तकनीक जिस तेजी से बदल रही है | समाज में परिवर्तन भी उसी तेजी से हो रहे हैं |

तकनीक के कई सकारात्मक पक्ष है लेकिन इसके नकारात्मक पक्ष भी हैं | व्यक्ति अकेला होते हुए भी खुद को दुनिया से जुड़ा समझता है | यह कुल मिलाकर आभासी दुनिया में जीने जैसा है | जिससे मानवीय संवेदनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है | इसलिए 21वीं सदी के मसले अलग हैं |

प्रस्तुत काव्य संग्रह ‘असंभव के खिलाफ’ में मैंने उन सभी मनोभावों और विसंगतियों को रेखांकित करने की कोशिश की है जिनसे वर्तमान काल में व्यक्ति दो-चार हो रहा है | आशा है कि मेरा यह प्रयास सफल रहा होगा |

आप सब के सहयोग, स्नेह की कामनाओं सहित-

दुलीचंद कालीरमन
करनाल (हरियाणा)
9468409948
<dulichand559@gmail.com>