महर्षि मेंहीं : जीवन और उपदेश ( मूल पुस्तक ) लेखक-संपादक- लाल दास जी महाराज

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    Description

    ' महर्षि मेंहीं : जीवन और उपदेश ' नाम्नी इस पुस्तिका के आरंभ में परमाराध्य सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत की गयी है , जो बड़ी ही प्रांजल , ओजपूर्ण तथा प्रवाहमयी भाषा में लिखी गयी है और अपने - आपमें पूर्ण भी कही जा सकती है । इसके बाद गुरुदेव के उन ६३ प्रवचनों के महत्त्वपूर्ण अंश शीर्षक - सहित दिये गये हैं , जो प्रायः ‘ शान्ति - संदेश ' मासिक पत्रिका के विभिन्न अंकों में छपे हुए हैं । ये प्रवचन - अंश प्रायः दृष्टान्त - पूर्ण , अत्यन्त मधुर , रोचक , शिक्षाप्रद और सत्प्रेरक हैं । | पुस्तक के अन्त में स्तुति - विनती , सन्तमत - सिद्धान्त , सन्तमत की परिभाषा और आरती के पद्य दिये गये हैं । सन्तमत के सत्संगी प्रतिदिन किये जानेवाले सत्संगों में इनका पाठ किया करते हैं । इस प्रकार यह छोटी - सी पुस्तक सत्संगियों के लिए बड़े लाभ और उपयोग की सामग्री से भरपूर है , यह उनके दैनिक सत्संग का आधार बनेगी।
    पृष्ठ 96+ 6, सहयोग राशि 20/-+डाकखर्च।