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जीवन - संदेश, नाम्नी इस आठवीं पुस्तक में भी मेरी ही ८६४ सूक्तियों का • संकलन किया गया है ।

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    Description

    स्वतःस्फूर्त मेरी सूक्तियों के सात संकलन ' अनमोल वचन ' , ' जीवन - कला ' , ' अमर वाणी ' , ' व्यावहारिक शिक्षा ' , ' नैतिक शिक्षा ' , ' प्रेरक विचार ' , ' धार्मिक शिक्षा ' नामों से पहले भी प्रकाशित ' जीवन - संदेश ' नाम्नी इस आठवीं पुस्तक में भी मेरी ही ८६४ सूक्तियों का • संकलन किया गया है । ये सूक्तियाँ शुच्याचार , शिष्टाचार , सामाजिक व्यवहार , नीति , मनोविज्ञान , सत्य नियम , अध्यात्म - ज्ञान और मोक्ष - धर्म आदि विषयों से संबंध रखती हैं । पस्तक की जो बातें सदग्रंथों के वचनों से मेल खाती हों , समझना चाहिए कि वे मेरे स्वाध्याय से प्राप्त बातें हैं अथवा ऐसा भी समझना चाहिए कि सत्य पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार नहीं होता ; जो सत्य एक व्यक्ति को अनुभूत हो सकता है , वह दूसरे को भी अनुभूत हो सकता है । _ _ _ पुस्तक में जो व्यवहार्य बातें आयी हैं , मेरा दावा नहीं है कि मैं उन्हें मस्तैदी के साथ अपने जीवन में उतार लिया करता हूँ । हाँ , मैं उन्हें उतारने का यथासंभव प्रयास अवश्य कर रहा हूँ । पुस्तक की वाणियाँ विषयबद्ध करके संकलित नहीं की गयी हैं । प्रत्येक दो पृष्ठों के ऊपर जो शीर्षक दिया गया है , वह यों ही - केवल पुस्तक की सुन्दरता बढ़ाने के लिए दे दिया गया है । मैंने यह पुस्तक इसलिए छपवायी कि यह भविष्य में मेरा और इसे पढ़नेवाले अन्य मुमुक्षु जनों का भी मार्ग - प्रदर्शन कर सके ।