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सत्संग सुधा भाग 1 (मूल पुस्तक) अनुभव ज्ञान युक्त 18 प्रवचनों का संग्रह

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    Description

    पूज्य महर्षिजी महाराज लगभग ६० वर्षों से उपनिषद् एवं संत - साहित्य के प्रमाणों के आधार पर विन्दु - नाद की साधना तथा उसका उपदेश कर रहे हैं । | इन्होंने स्वयं इस साधना का दृढ़ अभ्यास किया है । और उन सत्यों के साक्षात्कार करने की चेष्टा की है , जिनकी अभिव्यक्ति कबीर , दादू , नानक आदि संतों ने अपनी वाणियों में की हैं । जिस प्रकार एक वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में अपने पूर्ववर्ती वैज्ञानिकों के उपलब्ध सत्य का परीक्षण कर यह कहने में समर्थ होता है कि उपलब्ध परिणाम शत प्रतिशत सत्य है , उसी भाँति महर्षिजी ने गत ६० वर्षों से अपने पूर्ववर्ती संतों की भाँति आचरण , आहार - विहार , सदाचार एवं साधना करके यह कहने की समर्थता उपलब्ध की है कि उपनिषदों और संत - साहित्य में विवेचित ज्ञान सत्य है और नाद - विन्दु - साधना के माध्यम से दृढ़ ध्यानाभ्यास करके उन सत्यों का साक्षात्कार किया जा सकता है । इस संग्रह के प्रवचनों में भी महर्षिजी की समाधि - साधना के अनुभव अपनी अभिव्यक्ति कर रहे हैं । यद्यपि इन प्रवचनों में किसी नवीन विषय का प्रतिपादन नहीं किया गया है , तथापि इनकी शैली एकदम मौलिक एवं अभूतपूर्व है । इन विशेषताओं का कारण महर्षिजी की दृढ़ साधना है ।