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संतमत का शब्द विज्ञान, (पूज्यपाद लालदास जी महाराज रचित एवं व्याख्याकृत पुस्तक)

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    Description

    संसार में कोई भी क्रिया कम्पन के बिना नहीं हो सकती ।सृष्टि के पूर्व अनन्तस्वरूपी परमात्मा ने अपनी अपरंपार शक्तिमत्ता से एक शब्द पैदा किया , उसमें जो कम्पन था , उसी से सारी सृष्टि का विकास हुआ । वेद , उपनिषद् , संतवाणी , बाइबिल , कुरान आदि प्रायः सभी धर्मग्रंथ इस बात को स्वीकार करते हैं कि शब्द से सृष्टि हुई है ।यह शब्द संसार में ‘ ओम् ' कहकर विख्यात है ।अंतस्साधना के द्वारा जिसकी सुरत इस शब्द को पकड़ती है , वही परमात्मा का साक्षात्कार कर पाता है ।यह आदिशब्द परमात्मा का स्वरूप , अलौकिक , नित्य , सर्वव्यापी , निर्मल चेतन , निर्गुण , अव्यक्त और अकथनीय है । इस शब्द की बड़ी महिमा है । #न नादेन विना ज्ञानं न नादेन विना शिवः ।नादरूपं परं ज्योतिर्नादरूपी परो हरिः ॥# अर्थात् नाद के बिना ज्ञान नहीं हो सकता ;नाद के बिना कल्याण नहीं हो सकता ;नाद ही श्रेष्ठ ज्योतिस्वरूप है और नादरूप ही हरि हैं । परमाराध्य सद्गुरु महर्षि मुँह परमहंसजी महाराज अपनी पदावली के १२६वें पद्य में कहते हैं कि यह आदिशब्द गुरु का स्वरूप , शान्ति प्रदान करनेवाला और अनुपम अर्थात् अद्वितीय है। पूरी पुस्तक में इसी आदिनाथ की चर्चा की गई है। 72 पृष्ठों की इस पुस्तक का सहयोग राशि मात्र ₹15 है।