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MS01, सत्संग योग चारों भाग (मूल पुस्तक) -सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज द्वारा लिखित+संग्रहृत

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    Description

    ' सत्संग - योग ' के तीन भागों में इन्हीं वाणियों का समागम है । अनेक सत्पुरुषों और सन्तों के संग का प्रतिनिधि - स्वरूप यह ' सत्संग - योग ' है । यह चार भागों में लिखा गया है । वेदों , उपनिषदों , श्रीमद्भगवद्गीता , श्रीमद्भागवत अध्यात्मरामायण , शिव - संहिता , ज्ञान सङ्कलिनी तन्त्र , बृहत्तन्त्रसार , ब्रह्माण्ड पुराणोत्तर गीता , महाभारत और दुर्गा सप्तशती इत्यादि के मोक्ष - सम्बन्धी सदुपदेशों का लाभ प्रथम भाग से प्राप्त होता है । दूसरे भाग में भगवान् महावीर , भगवान् बुद्ध , भगवान् शंकराचार्य , महायोगी गोरखनाथ जी महाराज , संत कबीर साहब , संत रैदास , सन्त कमाल साहब , गुरु नानक साहब , दादू दयाल साहब , पलटू साहब , सुन्दर दास जी महाराज , गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज , भक्तवर सूरदास जी महाराज , हाथरस - निवासी तुलसी साहब , राधास्वामी साहब , श्रीरामकृष्ण परमहंस , स्वामी विवेकानन्द जी महाराज , लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक , बाबा देवी साहब इत्यादि बावन सन्तों , महात्माओं और भक्तों के सदुपदेश । तीसरे भाग में वर्तमान विद्वानों और महात्माओं के उत्तमोत्तम वचन हैं , जो ' कल्याण ' पत्र तथा अन्य ग्रन्थों से उद्धृत हैं । इन तीनों के अध्ययन और मनन से ब्रह्म , ईश्वर और परमात्मा का , ईश्वर - भक्ति का , बन्धन तथा मोक्ष का उत्तम ज्ञान होता है ।
    सत्संग-योग (चारो भाग)- सद्गुरु महर्षि मेंहीं की यह पाँचवीं रचना है। इसमें सूक्ष्म भक्ति का निरूपण वेद, शास्त्र, उपनिषद्, उत्तर- गीता, गीता, अध्यात्म-रामायण, महाभारत, संतवाणी और आधुनिक विचारकों के विचारों द्वारा किया गया है। इसके स्वाध्याय और चिन्तन-मनन से अध्यात्म-पथ के पथिकों को सत्पथ मिल जाता है। इसका प्रकाशन सर्वप्रथम 1940 ई0 में हुआ था। वर्तमान में यह 21 वें संस्करण का पुस्तक प्रस्तुत है जिससे मूल रूप में ही छापा गया है।
    यह मूल पुस्तक आपको स्पीड पोस्ट डाक द्वारा भेजा जाएगा। जिसे भेजने का खर्चा अलग से लगेगा। इसका पीडीएफ फाइल भी उपलब्ध है।