product-preview-thumbnail-0product-preview-thumbnail-1product-preview-thumbnail-2product-preview-thumbnail-3product-preview-thumbnail-4

Ek Gupt Mat.pdf, एक गुप्त मत -महर्षि संतसेवी paramhans जी महाराज

Share
  • Document
  • 160 KB
Min ₹ 15
Description

‘ औरउ एक गुपुत मत ' पर दृष्टि पड़ते ही मानस - अध्येता के मानस - पटल पर एक बिजली - सी कौंघ आएगी और वे हर्षातिरेक में बोल उठेंगे कि यह मानस की पंक्ति है । मानस की पंक्तियों में भी सामान्य पंक्ति नहीं , बल्कि इसमें निहित मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की सयुक्ति है , जिससे भवदु:ख की निवृत्ति होती है । रामचरितमानस में सगुण रामकथा रूप जल है । सुललित छंद , सोरठे , चौपाइयाँ , दोहे आदि बहुरंगे कमल हैं । सहज , बोधगम्यता , सरसतसा , उपमा - उपमेय , अनुपम अनुप्रास आदि पक्षियों के कलरव हैं । काव्यालंकार की झनकार भ्रमर - गुंजार है । अविधा , लक्षणा , और व्यंजना त्रिविध बयार हैं , जिनमें सर्वसाधारण जन के मन का आकर्षण स्वाभाविक है । इससे मनोरंजन होता है ; किन्तु दुःखभंजन तो राम के निरंजन - स्वरूप से ही संभव है । मानस में शिव भक्ति का सही स्वरूप क्या है इस पुस्तक में दर्शाया गया है।
पृष्ठ 27, मूल्य ₹15 मात्र, पीडीएफ फाइल हिंदी