शाही स्वामी भजनावली सटीक Shahi Bhajnawali Satik.pdf टीकाकार- स्वामी दयानंद

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अगम अगाध है संत की महिमा , को अस है जो गाई ॥ ब्रह्मा विष्णु महेश शारदा , यह जन गए लजाई । संत की महिमा संत ही जानें , और नेति कहि गाई ॥ - संत सद्गुरु महर्षि शाही स्वामीजी महाराज फिर मैं सर्व तुच्छ , अति अज्ञ भला कैसे इसे पूरा - पूरा वर्णन कर आप विज्ञ , विद्वानों को संतुष्ट कर सकेंगा । मैंने तो इसे आप विद्वत्तमों के अक्षांज के समक्ष एवं कर - कमलों तक इसीलिए पहुँचाने का प्रयास किया कि इसमें हुई खामियों , त्रुटियों , कमियों को आप सुधार कर देने की महति कृपा करेंगे । आपके इस पुनीत कार्य को मैं आपका बहुत बड़ा आशीर्वाद समझेंगा , ताकि अगले प्रकाशन में भक्तों तक यथार्थभाव पहुँच पाए । मैं उन्हें अपना आभार प्रकट करता हूँ , जिन्होंने इस कार्य को सम्पन्न करने में किसी भी तरह से हाथ बँटाया है । ‘ त्वदीयं वस्तु गुरुदेव तुभ्यमेव समर्पये । ' - दयानन्द
पृष्ठ 25, सहयोग राशि २०,